आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे राम के प्यारे हनुमान

                
                                                         
                            मेरे राम के प्यारे हनुमान
                                                                 
                            

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 1

आ जाना प्रभु, दीप जलाऊँ,
दीप जला के दीपावली मनाऊँ।

इसी दिन श्रीराम अवध को आए,
संग-संग सीता माँ, लखन भी आए।
तुम लेके आना उन सबको साथ,
हमारे घर आ जाना।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 2

आ जाना द्वारे, फूल बिछाऊँ,
फूल बिछाऊँ, प्रभु श्रीराम गुण गाऊँ।
सुनने को, हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 3

आ जाना प्रभु, तिलक लगाऊँ,
तिलक लगाके प्रभु, आरती उतारूँ।
आ जाना प्रभु, तिलक लगाऊँ,
तिलक लगाके प्रभु, आरती उतारूँ।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 4

आया दीपावली का शुभ त्योहार,
हमारे घर आ जाना।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 5

आ जाना प्रभु, वंदना करूँ,
वंदना करूँ, प्रभु वंदना करूँ।
आ जाना प्रभु, वंदना करूँ,
वंदना करूँ, प्रभु वंदना करूँ।

संग-संग लिए सियाराम,
हमारे घर आ जाना।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 6

आ जाना, तोहे राम कथा सुनाऊँ,
तोरे साथ मिलकर राम-राम धुन गाऊँ।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 7

आ जाना प्रभु, राम जी को भोग लगाएँ,
आ जाना प्रभु, राम जी को भोग लगाएँ,
भोग लगाते प्रभु, राम जी के हो जाएँ।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 8

आ जाना प्रभु, आ जाना,
आकर के दरस दिखा जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
आकर के दरस दिखा जाना।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 9

आ जाना, तोहे तुलसी माला पहनाऊँ,
आ जाना, तोहे तुलसी माला पहनाऊँ।
तुलसी माला पहनाकर,
तोहे गुड़-चना खिलाऊँ।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 10

सिया राम जी को लेके साथ-साथ,
हमारे घर आ जाना।

मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

अंतरा 11

प्रभु करने हमारा कल्याण,
हमारे घर आ जाना।

अंतिम मुखड़ा

ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।
आ जाना प्रभु, आ जाना,
ओ मेरे राम के प्यारे हनुमान,
हमारे घर आ जाना।

सियावर रामचंद्र महाराज की जय!
हनुमान जी महाराज की जय!
-आशीष आत्मिक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर