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हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम

                
                                                         
                            हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम
                                                                 
                            

मुखड़ा
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
कर दो कृपा, हे दयानिधान,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
अंतरा 1
तुम करुणामय, तुम दयानिधान,
तुम करुणामय, तुम दयानिधान।
कष्ट हरो, मेरे श्रीराम।
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
हे रघुनंदन, मेरे श्रीराम,
दया करो, हे दयानिधान।
अंतरा 2
प्रभु, तेरे द्वारे हूँ मैं आया,
प्रभु, तेरे द्वारे हूँ मैं आया।
मन में कई दुखों को लाया,
मन में कई दुखों को लाया।
दुखहर्ता, सुखकर्ता तुम प्रभु,
दुखहर्ता, सुखकर्ता तुम प्रभु।
कर देना मेरी नैया पार,
कर देना मेरी नैया पार।
मुखड़ा
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
कर दो कृपा, हे दयानिधान,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
अंतरा 3
दुनिया है दुख का मेला,
कोई न जाने प्रभु तेरी लीला।
दुनिया है दुख का मेला,
कोई न जाने प्रभु तेरी लीला।
मुखड़ा
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
अंतरा 4
मैं भिक्षुक, तुम दाता मेरे,
मैं भिक्षुक, तुम दाता मेरे।
कर देना प्रभु, मुझ पर दया,
कर देना प्रभु, मुझ पर दया।
अंतरा 5
तुम स्वामी, मैं सेवक तुम्हारा,
प्रभु, तुम स्वामी, मैं सेवक तुम्हारा।
करना प्रभु मेरा कल्याण।
मुखड़ा
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
अंतरा 6
तुम रक्षक, मैं दीन-हीन हूँ,
प्रभु, तुम रक्षक, मैं दीन-हीन हूँ।
करना सब पूरन काज।
मुखड़ा
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
अंतरा 7
दयावान तुम, मैं दया का याचक,
दयावान तुम, मैं दया का याचक।
कर देना प्रभु, मुझ पर दया,
कर देना प्रभु, मुझ पर दया।
अंतिम मुखड़ा
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
हे रघुनंदन, मेरे प्रभु राम,
करता निसदिन मैं तुम्हें प्रणाम।
श्री रामचंद्र महाराज की जय।
-आशीष आत्मिक
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1 hour ago

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