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गुरुजी पूजूँ मैं आपके चरण

                
                                                         
                            ज्ञान के खुल रहे हैं हमारे नयन
                                                                 
                            
जब से हमको मिली आपकी शरण
आशीष बरसा दिया प्यार के साथ में
गुरुजी पूजूँ मैं आपके जीवन भर चरण

लेकर आए थे साथ अपने अहम
सच्ची शिक्षा से तोड़े सारे वहम
क्षमाशीलता अपनाये व्यवहार में
सारे दोषों का किया निराकरण

विनम्रता अनुशासन और लगन
प्रेम भाईचारा सिखलाया संयम
विद्या बुद्धि का दान आपसे मिला
संवार दिया आपने हमारा जीवन

धैर्य सहनशीलता आत्म-नियंत्रण
मुक्तिबोध का दिखाया आपने दर्पण
सत्यनिष्ठा दया करुणा का ज्ञान
कृतज्ञता संतोष से भरे अंतर्मन

मोह माया में थे हमारे कदम
सन्मार्ग दिखाये, किये लाखों जतन
अबोध बालक से थे इस संसार में
बना दिया आपने हमें अनमोल रतन
- आशीष कुमार
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33 मिनट पहले

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