आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अवतार

                
                                                         
                            परछाइयां सबकी होती हैं
                                                                 
                            
किसी की कम स्याह
किसी की गहरी ।
कभी कभी ज्यादा उजले स्वरूप
घने काले भी हो सकते हैं।
महामानव ऐसे कम ही होते हैं
देव स्वरूप
जिनकी परछाई नही होती
केवल आभा मंडल होता है
जिन्हे हम अवतार कहते हैं।
-आशीष द्विवेदी 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर