नन्ही सी तितली थी वो
अचानक एक दिन मुरझा गई
ना जाने कैसी बात थी वो
जो जिंदगी उसे सिखा गई
घर के आंगन में तो वो
तितली सी घूमा करती थी
पकड़ने चलते थे जब बाबा
तितली सी उड़ जाया करती थी
लेकिन कोई तो ऐसी बात थी
जो उसे सताया करती थी
कुछ नही सब ठीक है बाबा
बस यहीं बताया करती थी
पायल की झनकार सी थी वो
अब गुमसुम क्यूं रहने लगी
कुछ फूलों में ज़हर है सुनलो
तितलियों से कहने लगी
आखिर ऐसी क्या बात थी वो
जो तितली को मुरझा गई
ना जाने कैसी बात थी वो
जो जिंदगी उसे सिखा गई।।
धन्यवाद
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