आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बाल दुर्व्यवहार

                
                                                         
                            नहीं होना है पैदा मुझको माँ
                                                                 
                            
हद से ज्यादा डरती हूँ मैं
क्यूं मेरे लिए नहीं ये दुनिया
सबसे सुना करती हूँ मैं।
माँ मुझको भी बतलाओ कुछ
तुमने भी क्यूं ये बात कही?
क्यूं मेरे लिए नहीं ये दुनिया
आखिर ऐसी क्या बात हुई?
कैसी है दुनिया माँ
आज मुझे बतलाओ ना
लोग यहां के कैसे है?
लोरी में गाके सुनाओ ना
माँ की आँखें भीग गई
बेटी ने जब सवाल किया
थाम लिया कोख को अपनी
और बेटी को प्यार किया।
बेटी नहीं सुरक्षित तुम इस दुनिया में
बेटी होना एक गलती है
भूखे भेड़िये नज़र है रखते
हर रोज़ एक बेटी जलती है
डर मुझको इस बात का है
जब तुम बड़ी हो जाओगी
माँ कैसे काटेगी वो दिन
जब पहली बार कहीं जाओगी
बेटी संभल के चलना इस दुनिया में
ये दुनिया बहुत निराली है
दिखने में इंसान ही है सब
लेकिन बहुत शिकारी है।।।



- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें

 
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर