मोहब्बत के धोखे में जी रहे थे हम
जीवन से मिले ज़ख़्मों को सी रहे थे हम।
सोचा कुछ नहीं तो मोहब्बत तो है
किसी के दिल में मेरे लिए चाहत तो है।
क्या चाहिए हमें प्यार के सिवा
कोई मेरा है इतना ही इक़रार के सिवा।
बंद पलकें किये पीछे चलते हुए
जीवन में संघर्षों को सहते हुए।
तभी एक दिन दिल को ठोकर लगी
क़दम रूक गये आंखें भी खुल गयी।
पायी यूं हमने ऐतबार की सज़ा
दिल को मिली उसके प्यार की सज़ा।
क्या रिश्ते क्या नाते, एतबार क्या वफ़ा
भावनाओं की ना कोई कीमत यहां।।
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