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शरद ऋतु

                
                                                         
                            फिर खेत जुते,खुशबू महकी
                                                                 
                            
आई शरद ऋतु, कोयल चहकी
पंख पसारे नाचे मस्त मगन मोर
कु हु कु हु कु कबूतर करते शोर
झूमे पेड़ लहराए लताएँ मतवाली
चिडिया करती बच्चों की रखवाली
सूरज दिन ने अपना समय घटाया
चाँदनी रात का गहरा पहरा छाया।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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