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हँसते-हँसते रुक जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

                
                                                         
                            हँसते-हँसते रुक जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
                                                                 
                            
आँखों में नमी भर लाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

भीगी हुई तन्हा रातों में, बे-बात ही जाग के बिस्तर पर
तस्वीर कोई सहलाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

महफ़िल में भी जब सब बैठेंगे, सौ लोग पुकारें नाम तिरा
तुम ध्यान कहीं बहकाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

इक बात को सोच के घंटों तक, ख़ामोश हवा के साए में
चुपके से कभी मुस्काओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

जो आज अना की बातें हैं, जो ख़ुद पे बड़ा मग़रूर हो तुम
हर बात पे झुकते जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

तुम जिन को फ़साना कहते हो, जिन दर्दों को पागलपन समझा
उन लफ़्ज़ों को दोहराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

'शहज़ाद' की बातों को सुन कर जो आज हँसी आ जाती है
इक दिन ये ग़ज़ल दोहराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
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3 घंटे पहले

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