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गिद्धदृष्टि

                
                                                         
                            इंसान,क्या गिद्ध है ?
                                                                 
                            
नही..
गिद्ध से भी बदतर,
गिद्ध तो मृत शरीर
खाते है,

इंसान तो,
जीवित शरीर ही खाने की,
लालसा रखते है,
हर एक पुरुष में
एक गिद्ध छुपा है,
जो एक शरीर ढूंढता है,

आसमान मे उड़ते हुए नही,
घरों,और सड़को,
दुकानों,चौराहों,
पर घूमते हुए,

अंदर से लिसलिसा,और,
बहुत कुरूप है,
बाहर एक झूठ का सुंदर,
लबादा ओढ़े हुए,
हर शरीर को
भूखी नजर से देखते हुए,
जिंदा खा जाने को तैयार,
इंसान गिद्ध से भी,
आगे है,

ओह !
ये लोलुपता,
ये तृष्णा !
तुम,
भूख से मरना,
तिल तिल के मरना,
लेकिन,
गिद्धों से बच के रहना,

ये गिद्ध,
मोर और कोयल
की तरह दिखते है,
सुंदर,प्यार से बोलने वाले,
लेकिन निगल जाने को तैयार,
तुमको प्यार से बिठाएंगे,
हमदर्द बनेंगे,
और जब आप उनकी तरफ से निश्चिंत होंगे,
वो आप पर अपने क्रूर पंजे फैलाएंगे,
और आपको नर पिशाच,
दिखने लगेंगे,
इनसे बचना
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3 वर्ष पहले

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