क्यों हो रहे हो अधीर, क्यों हो रहे हो धैर्यहीन
विशेषकर उनके लिए जिन्होंने सारा जीवन कर दिया मलीन
अब उनको क्यों समझ रहे हो हीन और दीन
कोई बात पूछने पर क्यों कर देते हो अनसुना
क्यों देते हो टाल या कर देते हो अपमान
कहकर,नहीं है आपके बस का काम, समझ नहीं पाओगे
फिर क्यों सुनने को मिलता है आप नहीं कर पाओगे
जिन्होंने सब सिखाया, होकर धैर्यवान
उनके बार-बार पूछने पर क्यों हो जाते हो परेशान
जिस माँ ने सिखाया कलम पकड़ना, किताब पढ़ना,
एक शब्द भी नहीं बोल पाते थे,उन्होंने सिखाया बुलवाकर
संस्कृत के श्लोक, गणितीय सूत्र और तालिकाएँ, बार बार
तब उन्होंने तो नहीं कहा होगा- छोड़ दो तुम याद नहीं कर पाओगे
फिर क्यों सुनने को मिलता है आप नहीं कर पाओगे
स्मरण करो क्या यही किया था उन्होंने कभी तुम्हारे साथ
क्यों विस्मृत हैं कि तुम्हे पालने में पैसे के साथ-साथ, रहे धैर्यवान
जब माँ-बाप कुछ पूछते हैं या चाहते हैं साथ
तब धैर्य खोकर हो जाते हो खामोश और उनकी बात को देते हो टाल
जब चलते-चलते गिर जाते थे, गिरकर उठना सिखाया बार बार
तब उन्होंने कभी नहीं कहा होगा-छोड़ दो तुम चल नहीं पाओगे
फिर क्यों सुनने को मिलता है आप नहीं कर पाओगे
उन्होंने दिया बचपन में संरक्षण, अब उन्हें चाहिए ध्यान
उनका शरीर ही नहीं, आत्मविश्वास ही पड़ जाता है कमज़ोर
जब बचपन में थामा था हाथ, तो उम्मीद थी कि बुढ़ापे में देंगे साथ
उंगली वही है जिसने पहुँचाया उच्च स्थान
तब उन्होंने कभी नहीं कहा होगा- छोड़ दो पहुंच नहीं पाओगे'
फिर क्यों सुनने को मिलता है आप नहीं कर पाओगे
अब बदल गया संसार, पुरानी जानकारी नहीं आती काम
स्मार्टफोन, नेट बैंकिंग, ओटीपी , ऑनलाइन भुगतान, यूपीआई आदि
चाहते हैं सीखना, पर क्यों नहीं देते ध्यान
बना कर देखो नए जमाने के अनुरूप, उन्हें सिखा कर देखो एक बार
तुम्हारे घर आने से पहले सब कुछ मिलेगा तैयार
और फिर कह नहीं पाओगे, तुम कर नहीं पाओगे
फिर क्यों सुनने को मिलता है आप नहीं कर पाओगे
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