हमारे घर में है विशेष कुछ अपना
बाबाजी का एक पुराना चश्मा
घर में रखा है उनके बाकी सामान के साथ
गोल-गोल शीशे, तारों वाला फ्रेम
और एकल ब्रिज ही है उसकी पहचान
साथ में गले में लटकती हुई तार,
इसे पहनकर लगते थे वो बहुत ही कमाल
इसे तो अपना चुके हैं दिवंगत स्टीव जॉब्स और
जॉन लेनन जैसे मशहूर कलाकार
आंखों को सिर्फ दृष्टि सुधार से
कहीं अधिक सुविधा- सुरक्षा करता था प्रदान
उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का करता था समाधान
जब पहनते थे तो आ जाती थी बापू की याद
यह एक चश्मा नहीं था, था उनकी प्रिय संपत्ति,
उनकी जान, एक विशेष परिधान
चमका -चमका कर रखते थे साफ़-सुथरा और शानदार
गलतियों पर डराती थी इसके पीछे की आंखें, लाल-लाल
पर प्यार भी उतना ही मिलता था
जब हम विद्यालय में करते थे कुछ अच्छा, कुछ कमाल
घर में आ जाता था तूफान, जब हो जाता था गुमनाम
हर एक को इसे ढूंढने का मिल जाता था काम
फिर ढूंढने वाले को मिलता था मुंह-मांगा नक़द इनाम
नज़र के साथ –साथ था उनके व्यक्तित्व का निशान
चश्मे-वाला से ही होती थी गांव में उनकी पहचान
अपने व्यक्तित्व के अनुरूप रहते हमेशा वर्तमान
सदा पढ़ते लिखते रहना, था बहुत ही ज्ञान
ईश्वर की रचनाओं की सुंदरता और
प्रकृति को निहारने के आता था बहुत काम
चश्मा है ईश्वर का एक अद्भुत वरदान
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