वक़्त कभी किसी के सिकन्जे में नहीं रहता।
वो अपना सिकन्जा खुद बनाता है।
वक़्त कभी तो नासूर बन जाता।
कभी मलहम का काम भी करता।
इसलिए वक ही हमेशा गलत नहीं होता।
कई बार किस्मत और हालात भी .........
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