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वीर कर्ण

                
                                                         
                            सूरज की किरणों से जन्म लिया,
                                                                 
                            
धरा पर न्याय का धर्म जिया।
दुर्योधन का सच्चा यार बना,
हर संकट में वो दीवार बना।

दानवीर जिसकी पहचान रही,
धर्म निभाना जिसकी शान रही।
अपमान सहा, मगर झुका नहीं,
सत्य के मार्ग से हटा नहीं।

कुंती की ममता भी हार गई,
कर्ण की निष्ठा पर वार गई।
रथ का पहिया फंसा ज़रूर,
पर साहस उसका कभी न कमज़ोर।

कर्ण की गाथा अमर रहेगी,
वीरता की जोत सदा जलेगी।
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एक वर्ष पहले

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