अपने सोये हुये ख़्वाबों को मैं
फिर से जगाना चाहता हुँ
एक सपना हैं मेरा
जिसे मैं हर हाल मे पाना चाहता हुँ
अपने अंदर की सारी उलझनों को मैं
सुलझाना चाहता हुँ
तुम्हारे साथ औऱ कुछ करने का कोई
इरादा नहीं हैं मेरा,
बस एक बार तू मिल जाये
मैं तुम्हे गले से लगाना चाहता हुँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X