मनइ काहे पानी का ,
मोल करत नाही बाटइ
पानी मा जगत बसत बाटइ,
पानिन मा भुंई़ पौणत बाटइ ।
कभंऊ यहर खनइ इनारा,
कभंऊ ओहर चलइ पनारा,
कभंऊ नहर खनाइ के भइया,
पंपिंग सेट लगवावत बाटइ ।
मनइ काहे.......
छलनी कइके भुंई का सीना,
पानी खोब निकारत बाटइ,
तब चिचियाइ के कहिन भुंई मां,
इ न तोहार विरासत बाटइ ।
मनइ काहे.......
नदी तालाब मा महिषी नहवावई ,
कपड़ा खोब पछारत बाटइ ,
पानी पियइ घूंट भर भैइया,
बाकी क खोब अड़ावत बाटइ ।
मनइ काहे.....
ई संसार मा रहइ के बाटइ
त पानी का मोल समझइ क बाटइ ,
जइसे सोना चांदी सेरजथ्या ,
वइसे पानी क सेरजइ का बाटइ ।
मनइ काहे पानी का , मोल करत नाही बाटइ ,
पानी मा जगत बसत बाटइ,
पानिन मा भुंई पौणत बाटइ
- आरती तिवारी
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