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मन धीरे-धीरे

                
                                                         
                            मनन कर रहा है , तपन कर रहा है ,
                                                                 
                            
सृजन कर रहा है ए मन धीरे-धीरे ।
सरसता से जीवन ए जब जी रहा था,
सफलता से जीवन ए जब जी रहा था,
कटुता भरे दिन, मधुरता भरे दिन,
स्मरण कर रहा है ए मन धीरे-धीरे।
मनन......
कभी मन तड़पता है,
कभी मन बिखरता है,
कभी मन में करुणा का सागर उमड़ता है,
कि नदिया में जैसे लहर धीरे-धीरे।
मनन...
कभी मन संजोता है सपने सुनहरे,
कभी सोच में पड़ जाता है ए गहरे,
जैसे कोई पक्षी तिनका है चुनकर,
नीड़ वो अपना बनाता है धीरे-धीरे।
मनन......
गैरों की जहमत से,
गैरों की फितरत से,
खुद से संवरता है ,
खुद से निखरता है,
जैसे कि बालक कोई नन्हा सा,
कदमों पर अपने चले धीरे-धीरे।
मनन कर रहा है, तपन कर रहा है,
सृजन कर रहा है ए मन धीरे-धीरे।
- आरती तिवारी
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5 महीने पहले

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