माँ।
हर धूप की तपिश मे
अपने आँचल की छाया देती माँ।
कांच के आसमानी टुकड़े और उन पर बिछलती सूर्य की करुणा, उन सब को सहेज लेती है मँ।
दुनिया हमें ठुकरा देती है पर हमें दिल से अपनाती है माँ।
मीठी -मीठी प्यार भरी बातों से,
हमेशा थकान मिटती है माँ।
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ।
माँ का आसीष है दुवा मेरे लिए
बाट के अपना माथा ,आखें चेहरा दिऐ,
खुद से भी ज्यादा खूबसूरत हमें बना दिऐ
हर धूप की तपिश मे
अपने आँचल की छाया देती माँ
हर गम को हँसते-हँसते सह जाती माँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X