कृष्ण जन्माष्टमी पर -
एक बार फिर से भारत में आना तुम !
अर्जुन प्रभात
एक बार फिर से भारत में आना तुम।
भटक गए हैं लोग, सुपथ पर लाना तुम ।।
जरासंध कंसों का बढ़ता जोर यहां
सभी कुपथ पर, सबके मन में चोर यहां
दुर्योधन दु:शासन गौरवशाली हैं
विदुर युधिष्ठिर के घर बिल्कुल खाली हैं
अनाचार को जड़ से पुनः मिटाना तुम ।
भटक गए हैं लोग सुपथ पर लाना तुम।।
आज गरीबी भूखमरी का आलम है
कदम कदम पर पसर गया अब मातम है
गोकुल में अब गाय न चरती मिलती है
वृंदावन में कली न मन की खिलती है
आकर फिर खुशियों के फूल खिलाना तुम ।
भटक गए हैं लोग सुपथ पर लाना तुम।।
चौराहे पर चीर हरण नित होता है
धर्मराज नित शीश झुका कर रोता है
किंकर्तव्य विमूढ़ आज अर्जुन का मन
आज महाभारत का कैसा भीषण रण
पुनः पार्थ को गीता ज्ञान सिखाना तुम ।
भटक गए हैं लोग सुपथ पर लाना तुम।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X