मिले जो, सुख संग लेते हिलोरें सहरा में वे छोड़ चले ।।
इस दुनिया की कैसी ये रंगतजो भी मिले, वे खूब मिले।।
अरमानों की बात न पूछो अब तो आंसू भी सूख चले।।
सपने कैसे संग चले थे, कि सच के साथी नहीं मिले।।
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