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मेरी-आकांक्षा

                
                                                         
                            नारी गौरव देश का ,
                                                                 
                            

धन-वैभव जन-परिवेश का ,

इस चरितार्थ पर ,

मुझे चरित्र निभाना है ,

नारी है सबला,

नहीं वो अबला ,

सचित्र मुझे बन जाना है ,

कमी नहीं है मुझमे ऐसी ,

क्यों व्यक्त मैं आभार करूँ ,

एक बार मन ठान लूँ तो ,

हर सशक्त मै कार्य करूँ ,

स्वत्रंत आत्म-निर्णय,

लेती मै मन-इच्छा ,

है संग मेरे साथ मनोबल ,

नहीं हूँ आश्रित मैं पर-इच्छा ,

है कुछ ऐसी "मेरी-आकांक्षा ",

हो जाये पूरी महत्वाकांक्षा ,

सिर्फ सपनें ही नहीं सजाना है ,

इन्हें सच भी कर दिखलाना है ,

जीवन-पथ परायण पर ,

कर्तव्यों को अहम बनाना है ,

हों कितने भी काँटे पथ पर ,

लक्ष्य मात्र एक फूल नहीं ,

पूरे चमन को निशाना बनाना है।


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6 वर्ष पहले

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