नारी गौरव देश का ,
धन-वैभव जन-परिवेश का ,
इस चरितार्थ पर ,
मुझे चरित्र निभाना है ,
नारी है सबला,
नहीं वो अबला ,
सचित्र मुझे बन जाना है ,
कमी नहीं है मुझमे ऐसी ,
क्यों व्यक्त मैं आभार करूँ ,
एक बार मन ठान लूँ तो ,
हर सशक्त मै कार्य करूँ ,
स्वत्रंत आत्म-निर्णय,
लेती मै मन-इच्छा ,
है संग मेरे साथ मनोबल ,
नहीं हूँ आश्रित मैं पर-इच्छा ,
है कुछ ऐसी "मेरी-आकांक्षा ",
हो जाये पूरी महत्वाकांक्षा ,
सिर्फ सपनें ही नहीं सजाना है ,
इन्हें सच भी कर दिखलाना है ,
जीवन-पथ परायण पर ,
कर्तव्यों को अहम बनाना है ,
हों कितने भी काँटे पथ पर ,
लक्ष्य मात्र एक फूल नहीं ,
पूरे चमन को निशाना बनाना है।
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