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व्यर्थ गई चांद की चाँदनी

                
                                                         
                            व्यर्थ गई चाँद की चाँदनी तुम्हारे बिना,
                                                                 
                            
व्यर्थ गई रात रहस्य तुम्हारे बिना।
निरर्थक हो गई कल्पना मेरी,
व्यर्थ गई अल्पना तुम्हारे बिना।
व्यर्थ गई सेज तुम्हारे बिना,
धड़कता नहीं अब जिया मेरा,
लगता नहीं अब जिया मेरा।
मध्य रात्रि में याद आते हो तुम,
हम सोये नहीं, जाग लिए तुम्हारे बिना।
व्यर्थ गई चाँद की चाँदनी तुम्हारे बिना,
व्यर्थ गई इलाहाबाद की सड़कें सलोनी।
व्यर्थ गई पूर्णिमा की रात तुम्हारे बिना,
व्यय हो गए सारे सपन हमारे,
टूटे मंसूबे हमारे,
व्यर्थ गई चाँद की चाँदनी तुम्हारे बिना।
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3 महीने पहले

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