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एहसास

                
                                                         
                            एक बात आई है दिल में, तुझसे कहूँ या रहने दूँ,
                                                                 
                            
जो एहसास है इन आँखों में, उसे लफ़्ज़ों में बहने दूँ।

कुछ बातें दिल में रहकर भी, बहुत कुछ कह जाती हैं,
कुछ खामोशियाँ भी अक्सर, अपनी कहानी सुना जाती हैं।

बस इतना सा सवाल है, तू भी कभी महसूस करता है क्या?
जो बात आई है दिल में, वो तेरे दिल में भी आती है क्या?
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
12 घंटे पहले

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