ज़िंदगी में वैसे ही दर्द बहुत है,
ऊपर से कुछ उम्मीदें भी दर्द दे रही थीं।
उन्हें पकड़कर रखना अब मुश्किल था,
हर उम्मीद के साथ दिल थोड़ा और टूटता था।
इसलिए एक दिन ख़ुद से ही कह दिया—
हर उम्मीद को पूरा करना ज़रूरी नहीं,
कुछ उम्मीदों को छोड़ देना भी ज़रूरी है।
तो मैंने वो उम्मीद रखना ही छोड़ दिया…
क्योंकि कभी-कभी सुकून पाने के लिए,
उम्मीदों से भी आज़ाद होना पड़ता है।
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