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जबसे तुमसे इश्क हुआ

                
                                                         
                            जब तुमसे इश्क हुआ
                                                                 
                            
मेरा रोम रोम हर्षित हो उठा
जैसे अंबर का धरा से मिलन
हो गया

और इस सूनी बगिया में फिर
से चमन खिल गया

और ना चाहते हुए भी मैं
तुम पर ये दिल हार बैठा

और अपना सब कुछ भूल
तुम्हें अपना बना बैठा

सोचता हूं इज़हार ए इश्क़
बयां कैसे करूं

अपने जेहन के अल्फाज़ खोलूं
या आँखों ही आँखों में बयां कर दूं।

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4 वर्ष पहले

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