लाख ग़म हों मगर रुसवाई नहीं करता।
वो मेरा है इसलिए बुराई नहीं करता।।
मुझको आता है ज़ख़्म छुपाना यारो।
मैं जख्मों की मुंह दिखाई नहीं करता।।
छोड़ा है तो होगी कोई मजबूरी उसकी।
मैं उससे इश्क़ की दुहाई नहीं करता।।
बिखर जाऊं तब भी संभाल कर रखना।
मैं आईना हूं टूट कर भी बेवफ़ाई नहीं करता।।
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