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ऐ जिंदगी तुझे क्या खबर, कितने अस्मत लूट रहें हैं?........

                
                                                         
                            ऐ जिंदगी तुझे क्या खबर?
                                                                 
                            
कितने अस्मत लूट रहे हैं।
हां तुम्हारी ही स्वच्छंदता से
कितनो के घर टूट रहे हैं?
क्या जाहिल, क्या इल्म वाले?
सराबोर हैं एक वाहियात समा में,
तेरे दामन जहां हैं पड़ते,
क्या आवाम और मोहब्बत की दुकान वाले,
तू जाहिल है, तू मक्कार है,
जाम पर जाम कितने टूट रहे हैं,
ऐ जिंदगी तुझे क्या खबर,
कितने अस्मत लूट रहें हैं........२

जिसको अपनी किस्मत का पता नहीं,
वो क्या जाने आजादी का मोल क्या है?
मदिरा में जो डूबा हुआ है,
वो क्या जाने राष्ट्र का मोल क्या है?
सुरा पीते ही जो बकैती करता,
कोई बता दे वो किस देश का धरोहर है?
ये हर उस राज्य पर बोझ है,
जो सभ्य है, सदाचारी है, संस्कृतियुक्त है।
अहल-ए-सुरूर एक ऐसी चीज है,
खानदान दर खानदान तबाही का आलम है।
हमें चाहिए नशामुक्त आजादी,
जहां हमने जन्म लिया है, वो भारत हमारा है।
कितने अपनो की उम्मीदें टूट रहें हैं,
ऐ जिंदगी तुझे क्या खबर,
कितने अस्मत लूट रहें हैं........२

 
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8 घंटे पहले

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