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वर्षा की निस्तब्धता

                
                                                         
                            पीपल का पेड़
                                                                 
                            
ये मोटे मोटे तने
उस पर ये गहरी हरी
बारिश से नहाई हुई पत्तियाँ
सामने एक चित्तीदार कबूतर
गुज़रता हुआ एक आदमी
जिसने अभी अभी
एक सफेद कुत्ते को
को लइया चना डाल गया
वो जानता है कि कुत्ते
लइया चना नहीं खाते
कुत्ता सूंघ कर छोड़ देता है
वो चित्तीदार कबूतर
आता है भीगा हुआ लइया चुगने
कुत्ता उसकी घात में
अपनी जगह से हिलता नहीं
केवल उसकी पूंछ के कुछ
बाल—
हवा से हिल जाते है
अचानक कबूतर उड़कर
उस पीपल की सबसे मोटी शाख पर
जा बैठता है
और वो कुकुर जिसकी सारी चेष्टाएँ
असफल हो जाती है
दो लोग उसी पीपल के पास आग ताप रहे |
ठंड नहीं है उसके बावजूद भी |
तेज़ जा रही 'स्कॉर्पियो'-
का हॉर्न उनका ध्यान आकर्षित करता है
उसकी हैडलाइट से
बारिश की बूँद टकराकर
और चमक कर
कई टुकड़ों में बिखर जाती है
उसके बाद एक दीर्घ निस्तब्धता
काग़ज़ पर झीनी झीनी
बारिश की बूंदे
एक भूरे पन्ने को भिगो देती है
केवल बारिश का स्वर
और नीरव प्रकृति |
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एक घंटा पहले

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