महाकाली मां के चरणों में समर्पित
मनहरण घनाक्षरी छंद
ज्वालमाल मस्तक पे ,काल छाल अंग अंग
खप्पड़ लपक लै के, डाकिनी नचाये मां
डम डम डमरू यूं, घम घम घुंघरू यूं
थर थर थराये लो, सृष्टि को कंपाये मां
हुंक हुंक हुंकार, प्रलय अंगार धार
खड्ग धार मा र मार, दैत्य को खपाये मां
चंड मुंड खंड खंड, तांडवी प्रचंड रूप
भस्म अंग महाकाली, काल को चबाए मां
धक धक धके भाल, लप लप लपे जीभ
कप कप कांपे लोक, काल को डराये मां
चर्व चर्व चर्वै शीश, रक्त धार ढार ढार
खप्पड़ छलक जाय, डाकिनी अघाए मां
कड़कड़ कड़े व्योम, धड़धड़ धड़े धर
महा हुंक हुंकार से, सृष्टि को मिटाये मां
तांडवी प्रचंड पवै, झन्न झन्न झन्नाये
विकराल महाकाली, ब्रह्मांड चबाए मां
भसम अंगार अंग, मुंड कंकाल माल
प्रलय कराल ज्वाल , अंधकार लाये मां
खन खन खड़ग ले, छन छन छानै रक्त
दंत पंक्ति बीच दाब, दैत्य को पिसाये मां
घम घम घूमे पाँव, रसातल धंसे धरा
गगन मण्डल फोड़, रूधिर बहाये मां
जय-जय महाकाली, कालजयी महादेवी
शरण में आये जन, अभय दिलाये मां
गगन गरास लेइ, पाताल पसारि पाँव
चहुं दिसि घोर अंध, अंधियारी छाइ कै
दन्त पिसि पिंसि डारि, मुण्डन की माल हारि
डाकिनी झपटि झारि, लहू छिटकाइ कै
प्रलय पयोधर फरि, चहुं जुग हाहा करि
महाकाल थरि थरि, शरण में धाइ कै
जय जय महाकाली,कालिका कराल हाली
ब्रह्मांड उजारि डारि, अमर बजाइ कै
-भानु शर्मा रंज
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