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दिल से उतर गया है तो दिल से लगाऊं क्यों

                
                                                         
                            दिल से उतर गया है तो दिल से लगाऊं क्यों
                                                                 
                            
जब दूर जा चुका है तो उसको बुलाऊं क्यों

ये अश्क कर रहे हैं बयां मेरा हाल-ए-दिल
इस अश्क को मैं यूंही सबसे छुपाऊं क्यों

क्या इश्क़ है ख़ता कोई जो मुझसे हो गई
मैं बेवजह नज़र को यूं सबसे बचाऊं क्यों

उम्मीद लौटने की जब उसकी नहीं कोई
फिर घर को दोस्त मैं भला अपने सजाऊं क्यों

जब लफ़्ज़ से ही हो रहे हैं क़त्ल आजकल
खंजर भला मैं अब किसी पर भी उठाऊं क्यों

मिलना नहीं नसीब में ये बात है अलग
यारों भला मैं दिल से भी उसको भुलाऊं क्यों।
-अनमोल
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एक घंटा पहले

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