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एक तेरे नाम से बहलता है

                
                                                         
                            एक तेरे नाम से बहलता है
                                                                 
                            
वरना ये दिल बहुत मचलता है

हर घड़ी अब मेरा ये दिल जाना
तेरी गलियों में ही टहलता है

अश्क आँखों के फिर नहीं रुकते
मोम ये दिल का जब पिघलता है

जब कभी तेरी याद आती है
आँख में दरिया एक उछलता है

चाँद भी तेरा नाम लेता है
तब कहीं जाके वो निकलता है

फिर कभी वो संभल नहीं पाता
इश्क़ में जो यहां फिसलता है

अब तेरी याद का वो एक लावा
दिल में रह-रह के फिर उबलता है
-अनमोल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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