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जो जीवन को कविता कह गया

                
                                                         
                            वो शब्द जो तूने संसार में
                                                                 
                            
धीरे-धीरे गीत बना दिए,
आँखों से निकले हर लफ़्ज़ को
हमने दिल में बसा लिए।

तेरी कलम की वो मुलायम धारा,
हर ज़िंदगी में ख़ामोशियाँ भर गई,
आज जब तू चला गया है,
तेरी परछाइयाँ भी कविता बन गई।

सादा-सी ज़िंदगी के हर रूप को
तूने अदब में पिरो दिया,
अब तेरी कमी में हर पन्ना
एक खाली सा सुकून बो गया।

कोहरे सी खामोश शामों में
तेरी सोच की हल्की रोशनी रहती है,
और हर पाठक का दिल कहता है—
“तेरी याद यूँ ही ज़िंदा रहती है।”

तेरी लेखनी ने हमको जीना सिखाया,
तेरी ख़ामोशी ने दुख को कविता बनाया।
अब तेरा आँगन ख़ामोश है,
पर तेरी रचना के फूल हवाओं में महकते रहें...


 
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8 महीने पहले

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