मर्यादा
क्या है यह मर्यादा आप बताइए मुझे क्या है यह मर्यादा
हर एक रिश्ते में मर्यादाएं होती हैं
बेटे के हाथ आप को हमने पीटते हुए देखा है
उंगली जिनके पकड़ चलता था जिस राह पर
उसे राह पर पिता को घसीटते हुए देखा है
क्या है यह मर्यादा
हर एक रिश्ते में मर्यादाएं होती हैं
अगर यह पर कर दी तो रिश्ते की अहमियत चली जाती है
पानी मर्यादा तोरे तो विनाश होता है
वाणी मर्यादा तोरे तो सर्वनाश होता है
जल में समाकर जौहर किया था
रणथंबोर की महारानी रंग देवी ने
वही अंगणी कुंड में जौहर किया चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती ने
क्या है यह मर्यादा
जो कह दिया वह शब्द है
जो नहीं कह सके वह अनुभूति है
जो कहना है मगर कह नहीं सकते वह मर्यादा है
मर्यादा में रहने से अगर स्त्री का सम्मान है
तो स्त्री का सम्मान करना ही पुरुषों की मर्यादा है
मर्यादा में रहकर भी बेहद खूबसूरत दिख जा सकता है
जरूरी नहीं की सुंदरता के लिए अपने संस्कार मर्यादाएं त्यागी जाएं
घूंघट एक मर्यादा नहीं और प्रथम नहीं थी
गंदी नजरों से बचने की एक परंपरा थी
किस युग में भले ही अपने विचार नए रखिए
किंतु मर्यादा संस्कार पुरानी ही अच्छे लगते हैं
मर्यादा लंगकर चर्चित हो जाना कोई बड़ी बात नहीं अब
सुकून तो तब है जब संस्कारों की सीमा में रहकर दिलों को जीत जाए
मैं मर्यादाओं की धार कलम सी तलवार
अपने साथ लेकर चलती हूं
पर करती हूं घर की दहलीज जब भी
अपने संस्कार साथ लेकर चलती हूं
मैं मांग में सिंदूर पति के सात वचनों का
काजल में कुल की आम लेकर चलती हूं
बेबसी की चूड़ियां नहीं
आत्म सम्मान की शान लेकर चलती हूं
मर्यादा मर्यादा क्या है मर्यादा आप बताइए मुझे क्या है यह मर्यादा
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