सूने हो गए सारे
ममता के किनारे
कहाँ गया तू?
माँ तुझे पुकारे
तेरा इंतज़ार करे
ताके दहलीज़ को
रोज़ तैयार करे
तेरी कमीज़ को
तेरे लिबासों को
तेरी किताबों को
वो अब भी सँवारे
सूने हो गये सारे
ममता के किनारे
कहाँ गया तू?
माँ तुझे पुकारे
उसे विश्वास ही नहीं
कि तू अब नहीं यहाँ
वो भी क्या करे
आखिर है वो माँ
उसे आभास ही नहीं
कि तू छोड़ गया जहाँ
फिर भी तेरी दुआ करे
आखिर है वो माँ
छोड़ गया तू उसे किसके सहारे
सूने हो गये सारे
ममता के किनारे
कहाँ गया तू ?
माँ तुझे पुकारे
तेरी आवाज़ गूंजती थी कभी
आज सूना है घर
सूनी है हर खुशी
तेरे खिलौने पूछते हैं सभी
है कहाँ वो?
क्या खेलेगा नहीं?
क्या बताये वो माँ अपनी बेबसी
हो गयी जिसकी परछाई जुदा रे
सूने हो गए सारे
ममता के किनारे
कहाँ गया तू?
माँ तुझे पुकारे
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