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मैं आग लिखता हूं

                
                                                         
                            मैं सदा आग लिखता हूं
                                                                 
                            
मैं तप त्याग लिखता हूं
पढ़ कर मुझे जिसका खून न खौले
वह खून नहीं पानी है
पढ़ कर मुझे जो इंसान न डोले
खोई उसने अपनी जवानी है
पढ़ें मुझे वे जिनके आंखों में पानी है
जिसकी बची जवानी है
जो बलिदानी है
वही सच्चा हिंदुस्तानी है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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15 घंटे पहले

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