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वीर धीर गंभीर विजेता वही कहलाता है

                
                                                         
                            डरने से कुछ मिलता नहीं
                                                                 
                            
कायरता से पुष्प खिलता नहीं
वीर इंसान कभी डरता नहीं
वीर इंसान कभी मरता नहीं
वीरों की है यह मही
धंस जाए कायर कहीं
पर्वतों पर चढ़ कर जो तिरंगा लहराता है
वीर धीर गंभीर विजेता वही कहलाता है
वीरों का है यह अंबर
वीरों से है यह अंबर
वीरों से है सात समंदर
है ईश्वर जिसके अंदर
है विशाल सात समंदर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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