आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तिरंगा मेरा

                
                                                         
                            मेरे अंदर तिरंगा उत्साह जगाए
                                                                 
                            
तिरंगा जोश जगाए
तिरंगा जवानी लाए
तिरंगा लहर लहर लहराए
तिरंगा स्वाभिमान जगाए
तिरंगा अंबर तक जाए
तिरंगे से हिंद की खुशबू आए
तिरंगे के लिए शहीदों ने प्राण गंवाईं
तिरंगे के लिए कवियों ने कलम चलाई
तिरंगा मेरा शान है
तिरंगा मेरा प्राण है
तिरंगे को झुकने न दूंगा
तिरंगे को गिरने न दूंगा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर