अपने कर्तव्य पर जो तैनात रहा
सदा लक्ष्य उसके ही हाथ रहा
साहस से जो बढ़ता रहा
वही जीतता, बढ़ता रहा
सपना जो गढ़ता रहा
वही तरंगों सा बढ़ता रहा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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