मन मेरा तड़प रहा है हिंदुस्तान के प्यार के लिए
जब हूं मैं विदेश में तड़पता हूं गांव जवार के लिए
तड़पता है मन मेरा गंगा की धार के लिए
तड़पता है मन मेरा पुष्प कचनार के लिए
चाहता हूं करूं कुछ स्वदेश प्यार के लिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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