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हाँ, मैंने वक्त की भी अद्भुत प्रतिमा देखी है।

                
                                                         
                            मैंने गरीबी की एक मिसाल देखी है,
                                                                 
                            
जीती-जागती एक इंसान देखी है।
ऊर्जा से भरपूर वह भंडार देखी है,
आतप से जलती वह खाली पांव देखी है।
कार्य के लिए भटकती, तृष्णा से तड़पती वह
ईसान देखी है,
वेदना से कराहती, जख्म से भरी वह खाली गाँव
देखी है।
ललाट से गिरते मुक्ता-सी प्रतीत होती स्वेद की
हर एक बूंद देखी है,
हाँ, मैंने गरीबी की एक मिसाल देखी है।
हयात से जूझती एक जीती-जागती इंसान
देखी है,
मुस्कान के पीछे छिपी वेदना की एक अवतार
देखी है।
परिस्थिति के पीछे छिपी लाचारी की एक प्रतिमा
देखी है,
जगदीश की भी मैंने एक महिमा देखी है।
प्रत्यक्ष नेत्रों के सम्मुख मैंने जीती-जागती एक
करिश्मा देखी है,
हाँ, मैंने वक्त की भी अद्भुत प्रतिमा देखी है।
- अंकित कुमार
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38 मिनट पहले

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