शीष मेरा झुका नहीं कहीं
शीष मेरा झुका तो झुकी मही
स्वाभिमान है मेरा अंबर से ऊंचा
हूं मैं बागी बलिया जो रहा सदा सबसे ऊंचा
करूंगा काम ऐसा
करेगा नहीं कोई जैसा
गंगा के मैदान वाला
मैं हूं बड़ा बलिदान वाला।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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