हम रहते हैं शान से
हम रहते हैं ईमान से
हम रहते हैं आन बान से
हम रहते हैं स्वाभिमान से
हम सुनते हैं ध्यान से
हम गुनते हैं ध्यान से
हम बतियाते हैं आसमान से
हम बतियाते हैं भगवान से
हम निडर
हम वीरवर
हम तत्पर
हम तीव्रतर
हमसे जो टकराता है
चूर चूर हो जाता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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