अपनों की सुनो
सपनों की सुनो
सबकी सुनो
पर परखो
तब सरको
आगे और आगे
देखो आगे
फिर जीतो जहान
ओ वीर जवान!
तेरे करों में है आसमान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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