मित्र है बड़ा अनमोल रतन
इसके सामने है फीका धन
पैसा रूपया आता है
फिर चला जाता है
मित्र मृत्यु तक साथ निभाता है
मर कर भी मित्रता जो बचाता है
सच्चा मित्र वही कहलाता है
सबसे बड़ा मित्र है हमारा चरित्र
हैं इससे बनते बड़े बड़े जीवन चित्र।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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