इधर धरती उधर आसमान
नीचे धरती ऊपर आसमान
ऊबड़-खाबड़ और ढलान
हरे भरे लहलहाते खेत खलिहान
हरे भरे हैं आम अमरूद के बागान
माटी की सोंधी महक और रेगिस्तान
इधर पर्वत पठार उधर गंगा का मैदान
कैसे कहूं धरा इसे, यह लगता स्वर्ग समान
कोई कुछ कहे कहता रहे सबसे सुंदर
सारे स्वर्ग से सुंदर
और मनोहर स्थान
सबसे प्यारा और न्यारा है हमारा हिंदुस्तान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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