सभी तीर्थों में श्रेष्ठ गया
श्रद्धा,विश्वास और आस्था की धरती गया
आयु,पुत्र,यश,स्वर्ग,कृति,पुष्टि दायिनी गया
वैभव,बल,पशु,सुख,धन धान्य दायिनी गया
अग्नि पुराण,गरुड़ पुराण कहते श्रेष्ठ गया
नारद पुराण,वायु पुराण कहते श्रेष्ठ गया
ब्रम्हा जी स्वयं रहते जहां,कहते उसे गया
वही गया,गया जी कहलाए
जहां पितृपक्ष मेला में संसार सारा आए
है यहां विष्णु पद मंदिर
बगल में है महा बोधि मंदिर
दिसंबर में लगता बौद्ध मय गया
सितंबर में लगता हिंदू मय गया
अक्टूबर में लगता सुंदरतम गया
नहीं जो गया, गया
वह कहीं नहीं गया
है वही नया नया
मोक्षदायिनी गया
ज्ञान दायिनी गया
फल्गु नदी में नहाइये
पिंडदान करके जाइए
आइए गया आइए
१९२३ में मैं आया गया
जीवन धन्य धन्य भया।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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