दिन भर बरसा पानी
रात भर बरसा पानी
है पानी में जिंदगानी
झम झम बरसा पानी
छम छम बरसा पानी
नीचे पानी, ऊपर पानी
मेंढक टर्रटराए
पंछी छुप जाएं
मोर झूम झूम नाच दिखाए
अंबर में बादल चम चम चमके
अंबर बादल गड़ गड़ दमके
सावन भावन आए
मन मयूर नाच दिखाए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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