पल पल मौसम बदलता है
जीतता वही जो चलता है
हारता वही जो ठहरता है
गीता कहती "चलते रहो
नीयत कर्म करते रहो
युद्ध भूमि से भागो नहीं
साहस को त्यागो नहीं
जो रुकता है
जो झुकता है
पाता वह सम्मान नहीं
जीतता वह आसमान नहीं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X