किसी का इस्तीफा तो कोई बर्खास्त
ऐसे होता है सरकारों का सूर्योदय सूर्यास्त
कोई पराया तो कोई खास
कोई दूर तो कोई पास
होता है कोई निराश
तो है किसी को आस
नेताओं से मत पूछो उनकी जाति,धर्म
करके सारे कर्म कुकर्म बचाते ये धर्म
आती सबको शर्म पर इनको कैसा शर्म?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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