मुजफ्फरपुर नहीं घूमे
तो कहीं नहीं घूमे
यहां लीची की मीठास है
यहां जीवन की आस है
यहां सफलता की आस है
यहां खुला आकाश है
यहां साहित्य का संसार है
यहां बड़ा संस्कार है
यहां नहीं अहंकार है
यहां बड़ा व्यापार है
यहां शिक्षा का आधार है
यहां प्यार है
यहां प्यार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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